तू था तो वक़्त कहीं ठहरता नहीं था,
अब वक़्त गुजरने में भी वक़्त लगता है...
बादलों से कह दो अब इतना भी ना बरसे.
गर मुझे उनकी याद आ गई,
तो मुकाबला बराबरी का होगा.!!
मिलने की उस ने अजीब शर्त रखी थी,
काटाे पे चल कर आओ मगर खुन न निकले..!!! `.
बस इन्सान ही है जो किसी से मिलता जुलता नहीं...!
.
.
वरना...
ज़माना तो भरपूर मिलावट का चल रहा है..!!
बंदा खुद की निगाह में सही होना चाहिये....
दुनिया तो भगवान से भी दुखी है
ऐ इश्क़ आ.... के फिर से नया तजुरबा करेदिल भूलने लगा है
पुरानी कहानियाँ...
मुद्दतें हो गयीं हैं चुप रहते-रहते,
कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते..
एक अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी.... जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं,
हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं ।
ऐसा कोई ज़िन्दगी से वादा तो नहीं था
तेरे बिना जीने का इरादा तो नहीं था !!
सभ मुझे ही कहते हैं , भूला दो उसे ...?
कोई उसे क्यों नहीं कहता वो मेरा हो जाए
" उन्हें बड़ा ही गज़ब शौक है हरियाली का.....
रोज जख्मों को हरा कर देते हैं"....!!
मेने तो यूहि फेरी थी रेत में उँगलियाँ
देखा गौर से तो तेरी तस्वीर बन गई!
मैं तुझसे कैसे कहूँ ए मेरे मेहरबान.
तू इलाज हैं मेरी हर उदासी का.
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा
अपनी कमजोरियो का जिकर्
कभी न करना जमाने से..... लोग कटी पतंगो को जम कर
लुटा करते है....
मजबूरिय ओढ़ के निकलता हु घर से...
शौक तो अब भी बहुत है बारिश में भीगने का
"काश वो समझते इस दिल की तड़प को,
तो यूँ हमें रुसवा ना किया होता,
उनकी ये बेरुखी भी मंज़ूर थी हमें,
बस एक बार हमें समझ लिया होता."
"हर मुलाकात पर वक्त का तकाज़ा हुआ..
हर याद पे दिल का दर्द ताजा हुआ..
सुनी थी सिर्फ हमने गज़लों मे जुदाई की बातें..
अब खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ."
ज़माने भर की ईदों से हमें
क्या वास्ता ग़ालिब......
.
हमारा चाँद दिख जाये, हमारी ईद
हो जाये"
अब वक़्त गुजरने में भी वक़्त लगता है...
बादलों से कह दो अब इतना भी ना बरसे.
गर मुझे उनकी याद आ गई,
तो मुकाबला बराबरी का होगा.!!
मिलने की उस ने अजीब शर्त रखी थी,
काटाे पे चल कर आओ मगर खुन न निकले..!!! `.
बस इन्सान ही है जो किसी से मिलता जुलता नहीं...!
.
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वरना...
ज़माना तो भरपूर मिलावट का चल रहा है..!!
बंदा खुद की निगाह में सही होना चाहिये....
दुनिया तो भगवान से भी दुखी है
ऐ इश्क़ आ.... के फिर से नया तजुरबा करेदिल भूलने लगा है
पुरानी कहानियाँ...
मुद्दतें हो गयीं हैं चुप रहते-रहते,
कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते..
एक अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी.... जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं,
हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं ।
ऐसा कोई ज़िन्दगी से वादा तो नहीं था
तेरे बिना जीने का इरादा तो नहीं था !!
सभ मुझे ही कहते हैं , भूला दो उसे ...?
कोई उसे क्यों नहीं कहता वो मेरा हो जाए
" उन्हें बड़ा ही गज़ब शौक है हरियाली का.....
रोज जख्मों को हरा कर देते हैं"....!!
मेने तो यूहि फेरी थी रेत में उँगलियाँ
देखा गौर से तो तेरी तस्वीर बन गई!
मैं तुझसे कैसे कहूँ ए मेरे मेहरबान.
तू इलाज हैं मेरी हर उदासी का.
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा
अपनी कमजोरियो का जिकर्
कभी न करना जमाने से..... लोग कटी पतंगो को जम कर
लुटा करते है....
मजबूरिय ओढ़ के निकलता हु घर से...
शौक तो अब भी बहुत है बारिश में भीगने का
"काश वो समझते इस दिल की तड़प को,
तो यूँ हमें रुसवा ना किया होता,
उनकी ये बेरुखी भी मंज़ूर थी हमें,
बस एक बार हमें समझ लिया होता."
"हर मुलाकात पर वक्त का तकाज़ा हुआ..
हर याद पे दिल का दर्द ताजा हुआ..
सुनी थी सिर्फ हमने गज़लों मे जुदाई की बातें..
अब खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ."
ज़माने भर की ईदों से हमें
क्या वास्ता ग़ालिब......
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हमारा चाँद दिख जाये, हमारी ईद
हो जाये"





