2 Line Hindi Shayari | Shayari in Hindi

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Tuesday, November 25, 2014

Hindi Shayari | Shayari in Hindi | Hindi Urdu Shayari | 2 line hindi shayari | two line hindi shayari

तू था तो वक़्त कहीं ठहरता नहीं था,
अब वक़्त गुजरने में भी वक़्त लगता है...

बादलों से कह दो अब इतना भी ना बरसे.
गर मुझे उनकी याद आ गई,
तो मुकाबला बराबरी का होगा.!!

मिलने की उस ने अजीब शर्त रखी थी,
काटाे पे चल कर आओ मगर खुन न निकले..!!! `.

बस इन्सान ही है जो किसी से मिलता जुलता नहीं...!
.
.
वरना...
ज़माना तो भरपूर मिलावट का चल रहा है..!! 

बंदा खुद की निगाह में सही होना चाहिये....
दुनिया तो भगवान से भी दुखी है 

ऐ इश्क़ आ.... के फिर से नया तजुरबा करेदिल भूलने लगा है
पुरानी कहानियाँ...

मुद्दतें हो गयीं हैं चुप रहते-रहते,
कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते..


एक अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी.... जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं,
हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं ।

ऐसा कोई ज़िन्दगी से वादा तो नहीं था
तेरे बिना जीने का इरादा तो नहीं था !! 


सभ मुझे ही कहते हैं , भूला दो उसे ...?
कोई उसे क्यों नहीं कहता वो मेरा हो जाए

" उन्हें बड़ा ही गज़ब शौक है हरियाली का.....
रोज जख्मों को हरा कर देते हैं"....!!

मेने तो यूहि फेरी थी रेत में उँगलियाँ
देखा गौर से तो तेरी तस्वीर बन गई! 

मैं तुझसे कैसे कहूँ ए मेरे मेहरबान.
तू इलाज हैं मेरी हर उदासी का.

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझे चाहेगा 

अपनी कमजोरियो का जिकर्
कभी न करना जमाने से..... लोग कटी पतंगो को जम कर
लुटा करते है....


मजबूरिय ओढ़ के निकलता हु घर से...
शौक तो अब भी बहुत है बारिश में भीगने का

"काश वो समझते इस दिल की तड़प को,
तो यूँ हमें रुसवा ना किया होता,
उनकी ये बेरुखी भी मंज़ूर थी हमें,
बस एक बार हमें समझ लिया होता."


"हर मुलाकात पर वक्त का तकाज़ा हुआ..
हर याद पे दिल का दर्द ताजा हुआ..
सुनी थी सिर्फ हमने गज़लों मे जुदाई की बातें..
अब खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ."



ज़माने भर की ईदों से हमें
क्या वास्ता ग़ालिब......
.
हमारा चाँद दिख जाये, हमारी ईद
हो जाये"



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Sunday, November 23, 2014

Shayari in Hindi | Hindi Urdu Shayari | Hindi Shayari | Shayari on life



तजुर्बे ने शेरों को खामोश रहना सीखाया,
क्योंकि दहाड़ कर शिकार नहीं किया जाता...


अपनी बहन की हिफ़ाजत का आज वचन देने वालों,
दूसरों की बहन की भी हिफ़ाजत की कसम भी खाना...

महबूब का घर हो या फरिश्तों की ज़मी,
जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा...

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता


सुना था आँखो आँखो में हो जाता है इश्क,,
अब के दौर में ऊंचे दामों में बिकते हैं दिल..!!


वक्त से पहले सब सिखा देती है,
ये भूख कमबक्त चीज ही ऐसी है.......


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शहर में लगता नहीं सहरा में घबराता है दिल
अब कहाँ ले जा के बैठें ऐसे दीवाने को हम


नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों से;
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं।


ये फिकर ये अदावतें ये अंदाज़--गुफ्तगू,
संभल जाओ तुम तुम्हें मोहब्बत हो रही है....


दुशमन सामने आने से भी डरते थे..
और वो पगली दिल से खेल के चली गई...

मुझे भी याद रखना.., जब लिखों ताऱीख वफ़ा...
के मैंने भी लुटाया है.., मौहब्बत मैं सुकून अपना...!!!

गुलचीं ने तो कोशिश कर डाली, सूनी हो चमन की हर डाली कांटों ने मुबारक काम किया, फूलों की हिफ़ाज़त कर बैठे

इस हादसे पे दोस्तो रोएं या हंसें हम सूरज जो छिप गया तो शहर में सुबह हुई

मरहम न सही कोई ज़ख्म ही दे दो ऐ ज़ालिम, महसूस तो हो कि तुम हमें अभी भूले नहीं हो।

बच्चे उस गरीब के खा सके खाना त्योहारों में तभी तो भगवान खुद बिक जाते हैं बाजारों में

दिल भी इक ज़िद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह या तो सब कुछ ही इसी चाहिये या कुछ भी नहीं.!!

डूबा हो जब अन्धेरे में हमसाये का मकान, अपने मकाँ में शमा जलाना गुनाह है! 

आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो


कितनी झूठी होती हैं मोहब्बत की कसमें
देखो तुम भी जिंदा हो और मैं भी


''यूँ प्यार नही छुपता पलको को झुकाने से, आँखो के लिफाफो मे तहरीर चमकती है..''


डूबा हो जब अन्धेरे में हमसाये का मकान, अपने मकाँ में शमा जलाना गुनाह है!


छोटा बनकर रहेँगे तो मिलेगी हर बड़ी रहमत...!! बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतार देती है....!!


तुम को "राहत" की तबीयत का नहीं अन्दाज़ा, वो भिखारी है मगर माँगो तो दुनिया दे दे।


अवसर सूर्योदय कि तरह होते हैं.. यदि आप ज्यादा देर तक 
प्रतिक्षा करते हैं ..तो आप उन्हें गवा बैठते हैं..


यूंही गुजर जाते हैं मीठे लम्हे मुसाफिर की तरह..और..
यादें वहीँ खड़ी रह जाती हैं रुके रास्तों की तरह..


हर बार हम पर इल्जाम लगा देते हो मोहब्बत का....!!
कभी खुद से भी पूछा है इतनी खुबसूरत क्यों हो....!!


खींच लेना वो मेरा पर्दे का कोना दफ़अतन*
और दुपट्टे से तिरा वो मुँह छुपाना याद है



सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना 
सीख लो ;
मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है ! ..:') :')

वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही यानी वादा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो

आग़ाज़-ए-मोहब्बत का अंजाम बस इतना है 
जब दिल में तमन्ना थी अब दिल ही तमन्ना है