तजुर्बे ने शेरों को खामोश रहना सीखाया,
क्योंकि दहाड़ कर शिकार नहीं किया जाता...
अपनी बहन की हिफ़ाजत का आज वचन देने वालों,
दूसरों की बहन की भी हिफ़ाजत की कसम भी खाना...
दूसरों की बहन की भी हिफ़ाजत की कसम भी खाना...
जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा...
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता
सुना था आँखो आँखो में हो जाता है इश्क,,
अब के दौर में ऊंचे दामों में बिकते हैं दिल..!!
वक्त से पहले सब सिखा देती है,
ये भूख कमबक्त चीज ही ऐसी है.......
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
शहर में लगता नहीं सहरा में घबराता है दिल
अब कहाँ ले जा के बैठें ऐसे दीवाने को हम
नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों से;
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं।
ये फिकर ये अदावतें ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू,
संभल जाओ तुम तुम्हें मोहब्बत हो रही है....
अब कहाँ ले जा के बैठें ऐसे दीवाने को हम
नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों से;
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं।
ये फिकर ये अदावतें ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू,
संभल जाओ तुम तुम्हें मोहब्बत हो रही है....
दुशमन सामने आने से भी डरते थे..
और वो पगली दिल से खेल के चली गई...
और वो पगली दिल से खेल के चली गई...
मुझे भी याद रखना.., जब लिखों ताऱीख ए वफ़ा...
के मैंने भी लुटाया है.., मौहब्बत मैं सुकून अपना...!!!
गुलचीं ने तो कोशिश कर डाली, सूनी हो चमन की हर डाली कांटों ने मुबारक काम किया, फूलों की हिफ़ाज़त कर बैठे
इस हादसे पे दोस्तो रोएं या हंसें हम सूरज जो छिप गया तो शहर में सुबह हुई
मरहम न सही कोई ज़ख्म ही दे दो ऐ ज़ालिम, महसूस तो हो कि तुम हमें अभी भूले नहीं हो।
बच्चे उस गरीब के खा सके खाना त्योहारों में तभी तो भगवान खुद बिक जाते हैं बाजारों में
दिल भी इक ज़िद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह या तो सब कुछ ही इसी चाहिये या कुछ भी नहीं.!!
डूबा हो जब अन्धेरे में हमसाये का मकान, अपने मकाँ में शमा जलाना गुनाह है!
आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो
कितनी झूठी होती हैं मोहब्बत की कसमें
देखो तुम भी जिंदा हो और मैं भी
''यूँ प्यार नही छुपता पलको को झुकाने से, आँखो के लिफाफो मे तहरीर चमकती है..''
डूबा हो जब अन्धेरे में हमसाये का मकान, अपने मकाँ में शमा जलाना गुनाह है!
छोटा बनकर रहेँगे तो मिलेगी हर बड़ी रहमत...!! बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतार देती है....!!
तुम को "राहत" की तबीयत का नहीं अन्दाज़ा, वो भिखारी है मगर माँगो तो दुनिया दे दे।
अवसर सूर्योदय कि तरह होते हैं.. यदि आप ज्यादा देर तक
प्रतिक्षा करते हैं ..तो आप उन्हें गवा बैठते हैं..
यूंही गुजर जाते हैं मीठे लम्हे मुसाफिर की तरह..और..
यादें वहीँ खड़ी रह जाती हैं रुके रास्तों की तरह..
हर बार हम पर इल्जाम लगा देते हो मोहब्बत का....!!
कभी खुद से भी पूछा है इतनी खुबसूरत क्यों हो....!!
खींच लेना वो मेरा पर्दे का कोना दफ़अतन*
और दुपट्टे से तिरा वो मुँह छुपाना याद है
सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना
सीख लो ;
मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है ! ..:') :')
वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही यानी वादा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो
आग़ाज़-ए-मोहब्बत का अंजाम बस इतना है
जब दिल में तमन्ना थी अब दिल ही तमन्ना है


No comments:
Post a Comment